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Wednesday, February 09, 2011

देसूरी कस्बे में भूकम्प का झटका

देसूरी,9 फरवरी। देसूरी कस्बे में बुधवार प्रातः 8.14 बजे भूकम्प का एक जोरदार झटका लगा। इसे करीब पांच सैंकड़ तक महसूस किया गया। जानमाल की क्षति के समाचार नहीं हैं।

Sunday, October 31, 2010

परिहार हलधर रत्न पुरस्कार से सम्मानित


देसूरी,31 अक्टूबर। दूरदर्शन केन्द्र जयपुर के प्रोड्यूसर वीरेन्द्र परिहार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कृषि एवं ग्रामीण पत्रकारिता क्षेत्र में प्रतिष्ठित हलधर रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया है। परिहार पाली निवासी हैं।
जयपुर के पिकंसिटी प्रेस कल्ब में आयोजित हुए हलधर टाइम्स समाचार पत्र के पांचवे वर्षगांठ समारोह में आयोजित समारोह में परिहार को सैकडों किसानों सहित नामचीन वरिष्ठ पत्राकारों की मौजूदगी में इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर विशिष्ठ अतिथि के रूप में पूर्व कृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी भी मौजूद थे।
परिहार गत पांच वर्षोसे दूरदर्शन जयपुर के ग्रामीण और कृषि कार्यक्रमों के प्रोड्यूसर के रूप मेें कार्यरत हैं। परिहार की कई डॉक्यूमेन्ट्री को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान और लोकप्रियता हासिल हो चुकी हैं। इसके अतिरिक्त वे ग्रामीण और कृषि से जुड़े विषयों पर स्वतंत्र लेखन और पत्रकारिता भी कर रहे हैं। इस वर्ष फरवरी में परिहार को ग्रामीण लेखन और राजस्थान की हिन्दी पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्यपाल और मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत जवाहरलाल दरड़ा लोकमत ग्रामीण पत्रकारिता पुरस्कार से सम्मानित भी कर चुके है।

Monday, June 21, 2010

एनीकट में पानी की बजाए रेत

गिरते जलस्तर को रोकने के लिए हर वर्ष सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के तहत जगह- जगह बनवाए गए एनीकट में पानी की बजाए रेत भरी है। सरकारी खजाने के लाखों रुपए रेत में दफन होते नजर आ रहे हैं। घाणेराव क्षेत्र के कई एनीकट ऐसे हैं जो बिना पानी के भर गए हैं यानी उनमें इतनी मात्रा में रेत और मलबा भर चुका है कि बरसात का पानी आया भी तो वह रुक नहीं पाएगा। सरकार द्वारा बरसात के पानी को एकत्र करने के लिए बनाए गए एनीकट पर ध्यान नहीं देने से उनमें रेत और मलबा एकत्र होता रहा और अब स्थिति यह आ चुकी है कि पानी रुकने के लिए तो थोड़ी सी जगह बची है। ज्यादा पानी आने पर बहकर आगे निकल जाएगा। पिछले कई वर्षों से लगातार अकाल पडऩे से कुओं का जलस्तर गिरने के कारण वे सूख गए। कुओं में पानी नहीं होने से किसान खेती के लिए पूरी तरह से बरसात पर निर्भर हो गए हैं। गिरते जलस्तर को रोकने व बरसाती पानी का संरक्षण करने के लिए सरकार ने महानरेगा एवं जलग्रहण योजना के तहत हर वर्ष करोड़ों रुपए खर्च कर एनीकट का निर्माण करवाया। गत वर्ष मुख्य नदी पर भीम कुंड एनीकट का निर्माण करीब दस लाख रुपए की लागत से किया गया। रेत भर जाने के कारण यह एनीकट रेत में दफन हो गया है। इसके अलावा जलग्रहण क्षेत्र में कई एनीकट का निर्माण करवाया गया, मगर उनका मलबा एनीकट में ही पड़ा है। ऐसे में इनमें बरसात का पानी भरने की कोई गुंजाइश नहीं है। इस ओर विभागीय अधिकारियों ने भी कोई गंभीरता नहीं दिखाई है।

Thursday, February 19, 2009

गरीब की ऑंख का इलाज क्या हैं

देसूरी,19 फरवरी। एक गरीब आदमी की नासूर बन चुकी आँख का इलाज नहीं हैं। होता तो उसकी आँख से किड़े झड़ नही रहे होते। उसकी आँख को देखकर हर कोई कह सकता हैं कि इलाज तो अमीरों का ही हो सकता हैं। आँख निकलवा देने के बाद भी उसकी आँख लाइलाज हैं। नासूर इतना बड़ा हो चुका हैं कि देखना वाला पहली नजर में ही दहल जाए। सारे पैसे खर्च करने के बाद अब उसके पास दर्द के मारे कराहने के सिवाय कोई चारा नहीं बस हैं। अब इस असहाय पिडि़त को एक ऐसे फरिश्ते का इंतजार हैं जो उसके लिए मददगार बन जाए।
उपखंड के भादरलाऊ ग्राम का निवासी चालीस वर्षिय सोनाराम पुत्र भोलाराम देवासी अपने इलाज के लिए भटकते हुए गुरूवार सांय देसूरी पहूॅंचा। उसकी ऑंख का नासूर देखकर हर कोई द्रवित हो उठा। उसके साथ आए बड़े भाई निम्बाराम ने बताया कि ढ़ाई साल पहल उसके ऑंख रोगग्रस्त हुई थी। इसके बाद बीसलपुर में उसके आँख की शल्य चिकित्सा की गई। लेकिन इलाज न होने पर जोधपुर में उसे अपनी आँख ही निकलवानी पड़ी। परंतु आँख गंवाकर भी उसे राहत नहीं मिली। इसके उलट आँख एक बड़ा नासूर बन गई। इसके बाद भी वह परामर्श व उपचार के लिए दर-दर की ठोकरें खाता रहा। इसी में उसका सारा पैसा खतम हो गया। उसके भाईयों ने भी मदद की।
इलाज कराने की कोशीश करते-करते सभी परिजन थक हार-चुके हैं। लेकिन बी.पी.एल परिवार के इस सदस्य का इलाज नहीं हो पाया। उसकी अस्सी साल की मां केसी देवी को बुढ़ापे में भी बेटे की आँख पर नासूर की चिंता खाए जा रही हैं। बेटे की आँख से किड़े झड़ते हुए देखना उसकी आदत बन गई हैं। बेटा अपनी आँख की पिड़ा से सारे दिन कराहता रहता हैं। वह अपनी पीड़ा को सहन करते-करते अकेला पड़ गया हैं। यहां तक उसकी मंदबुद्धी पत्नी भी पीहर चली गई। उसकी चार साल की बेटी भी पत्नी के पास हैं। काम-धंधा न कर पाने की स्थिति ने उसे गरीबी की हालत में ला खड़ा कर दिया। अब आगे इलाज कराए भी तो कहा से। गुरूवार को भी वह बीसलपुर के भैरव नैत्र चिकित्सालय गया था। जहां आँख की बीमारी के बारे में तो ठिक-ठिक पता नहीं चला। लेकिन उसे सलाह दी गई की वह इलाज के लिए मुम्बई के किसी बड़े हॉस्पीटल जाए। आँख के नासूर ने उसे पहले से ही गरीबी के चौखट पर खड़ा कर दिया हैं। अब पैसों के बिना तो वह घर से भी बाहर नहीं निकल सकता।
अब हर समय उसके सामने एक सवाल मंडराता हैं कि गरीब का इलाज नही होता हैं। उसे हर पल एक देवदूत का इंतजार रहता हैं। शायद कोई उसके इलाज के लिए पहल कर दे।